अनुच्छेद 200 (Article 200) – राज्यपाल द्वारा विधेयकों पर अनुमति
1. परिचय
● अनुच्छेद 200 भारतीय संविधान के भाग VI (राज्य) में स्थित है। यह निर्धारित करता है कि राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी विधेयक (Bill) के राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत होने पर राज्यपाल क्या कार्रवाई करेगा।
संवैधानिक उद्देश्य:
● राज्यपाल द्वारा विधेयकों की संवैधानिक वैधता सुनिश्चित करना।
● संघीय ढांचे (Federalism) की रक्षा करना।
● ऐसे मामलों में राष्ट्रपति की राय लेना, जहाँ राष्ट्रीय हित या संवैधानिक प्रश्न जुड़े हों।
2. अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल के विकल्प
(1) अनुमति देना (Assent)
● राज्यपाल विधेयक को स्वीकृति देता है।
● स्वीकृति मिलते ही वह राज्य का अधिनियम (State Act) बन जाता है।
(2) अनुमति रोकना (Withhold Assent)
● राज्यपाल अनुमति देने से मना कर सकता है।
● संविधान में इसके कारण स्पष्ट नहीं बताए गए हैं।
● इस शक्ति के प्रयोग पर विवाद होता रहा है क्योंकि राज्यपाल सामान्यतः मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है।
(3) राष्ट्रपति के विचार हेतु सुरक्षित रखना (Reserve for President)
राज्यपाल विधेयक राष्ट्रपति को भेज सकता है।
कब?
● जब विधेयक संविधान के विरुद्ध प्रतीत हो।
● जब राष्ट्रीय हित प्रभावित हो।
● जब केन्द्र और राज्य के बीच टकराव की संभावना हो।
● जब उच्च न्यायालय की शक्तियाँ प्रभावित होती हों (इस स्थिति में राष्ट्रपति के पास भेजना अनिवार्य माना जाता है)।
(4) पुनर्विचार हेतु लौटाना (Return for Reconsideration)
● केवल साधारण विधेयक (Ordinary Bill) वापस भेजा जा सकता है।
● धन विधेयक (Money Bill) वापस नहीं भेजा जा सकता।
● यदि विधानमंडल संशोधन करे या बिना संशोधन पुनः पारित कर दे, तो राज्यपाल उसे दोबारा वापस नहीं भेज सकता।
5. अनुच्छेद 200 से जुड़े प्रमुख न्यायिक निर्णय
(1) Shamsher Singh
● सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्यपाल सामान्यतः मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करेगा।
व्यक्तिगत विवेक (Discretion) सीमित है।
(2) State of Punjab v. Principal Secretary to the Governor
● सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्यपाल विधेयकों पर अनिश्चितकाल तक निर्णय लंबित नहीं रख सकता।
राज्यपाल को उचित समय में निर्णय लेना चाहिए।
7. अनुच्छेद 200 की आलोचना
● निर्णय लेने की समय-सीमा निर्धारित नहीं है।
● राजनीतिक टकराव की संभावना बढ़ती है।
● संघीय ढांचे पर प्रभाव पड़ सकता है।
● निर्वाचित सरकार और राज्यपाल के बीच टकराव उत्पन्न हो सकता है।
8. सुधार के सुझाव
● राज्यपाल के निर्णय की निश्चित समय-सीमा तय की जाए।
● सरकारिया आयोग और पुंछी आयोग की सिफारिशों के अनुसार राज्यपाल की भूमिका अधिक निष्पक्ष बनाई जाए।
● केवल संवैधानिक आधार पर ही राष्ट्रपति के पास विधेयक भेजा जाए।